Saturday, November 28, 2020

काश ऐसा मंजर होता

 



काश ऐसा मंजर होता, मेरे काँधे पे तेरा सर होता 

प्यारसे खेलता मै तेरी जुल्फोंसे , 

सांसों का तेरे , दिलसे मेरे 

रिश्ता कोई अलग होता 


उलझता मै तेरी लट से बारहा  , खुश्बूसे तेरी टकराता 

महकती हुइ सांसोंसे  लिपटता 

बेहकता हुवा , यूँही बेह जाता 

काश ऐसा मंजर ,मेरा मुक्क्दर होता 


एक थेंब तुझ्यासाठी 

२८ Nov २०२० 

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